सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया/सिकटा- -संवाद-सूत्र- -
आंगनबाड़ी के बच्चों को ताकतवर बनाने की योजना जमीनी स्तर से काफी दूर है। पौष्टिक आहार में मिलने वाला सुधा पावडर दुध बच्चों को नही मिल रहा है। इस दुध से आंगनबाड़ी सेविकाएं व उनके परिजन हृष्टपुष्ट जरूर हो रहे है। सरकार आंगनबाड़ी के बच्चों के शारिरिक व मानसिक विकास के लिए प्रति केन्द्र एक बैग सुधा दुध पावडर दिया गया है। एक बेग में पच्चीस पैकेट दुध था। इसे प्रति केन्द्र पर अध्ययनरत चालीस बच्चों को पीलाने का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक मंगलवार को प्रति बच्चे को अठारह ग्राम दुध बनाकर पीलाने है। इसी बीच आईसीडीएस कार्यालय कर्मियों द्वारा प्रति बैग से दो दो पैकेट दुध निकाल लिया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की योजना है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों में पढने वाले बच्चों का मानसिक व शारिरीक विकास होगा। इसे लेकर सरकार भी गम्भीर है। इसकी लगातार मोनिटरिंग भी हो रही है। मोनिटरिंग की जिम्मेदारी महिला पर्यवेक्षिका व सीडीपीओ को है। लेकिन इसके बावजूद भी दुध पीलाकर बच्चों को विकसित करने की योजना अपने निर्धारित जगह से काफी दूर है। सरकार के तरफ से मिलने वाले दुध से केन्द्र में पढने वाले बच्चों की सेहत बेहतर तो नही हो रही है पर आंगनबाड़ी सेविकाओं समेत उनके परिजन जरूर ताकतवर बन रहे है। सबसे पहलू तो यह है कि प्रति केन्द्र पर चालीस बच्चों को पढाने है। वह भी जो विद्यालय से दूर है। इस बीच प्रखंड में कुल 146 आंगनबाड़ी केंन्द्र स्थापित किये गये है। जिसमें करीब साठ फिसद केन्द्र नही चलते है। जो संचालित होते है उनमें कोई केन्द्र नही है जहां रोज निर्धारित चालीस बच्चें पढने आते है। संचालित सभी केन्द्रों पर आधे से एक दर्जन बच्चें शिक्षा अध्ययन को पहुंचते है। इसका खुलासा कई बार औचक निरीक्षण के बाद हो चुका है। सरकार के तरफ से बरोज पोषाहार मेंं चना दाल मिला खिचडी खिलाने का भी विधान है। पर इसके जगह बिस्कुट देकर काम चला दिया जाता है। सीडीपीओ मनोरमा कुमारी कार्यालय बहुत कम आती है। लगातार तीन दिनों से सम्पर्क किया गया परन्तू नही मिलीं। मोबाईल की घंटी बजती रही फर रिसीव नही हुआ। जिससे उनका पक्ष नही मिल सका।
आंगनबाड़ी के बच्चों को ताकतवर बनाने की योजना जमीनी स्तर से काफी दूर है। पौष्टिक आहार में मिलने वाला सुधा पावडर दुध बच्चों को नही मिल रहा है। इस दुध से आंगनबाड़ी सेविकाएं व उनके परिजन हृष्टपुष्ट जरूर हो रहे है। सरकार आंगनबाड़ी के बच्चों के शारिरिक व मानसिक विकास के लिए प्रति केन्द्र एक बैग सुधा दुध पावडर दिया गया है। एक बेग में पच्चीस पैकेट दुध था। इसे प्रति केन्द्र पर अध्ययनरत चालीस बच्चों को पीलाने का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक मंगलवार को प्रति बच्चे को अठारह ग्राम दुध बनाकर पीलाने है। इसी बीच आईसीडीएस कार्यालय कर्मियों द्वारा प्रति बैग से दो दो पैकेट दुध निकाल लिया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की योजना है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों में पढने वाले बच्चों का मानसिक व शारिरीक विकास होगा। इसे लेकर सरकार भी गम्भीर है। इसकी लगातार मोनिटरिंग भी हो रही है। मोनिटरिंग की जिम्मेदारी महिला पर्यवेक्षिका व सीडीपीओ को है। लेकिन इसके बावजूद भी दुध पीलाकर बच्चों को विकसित करने की योजना अपने निर्धारित जगह से काफी दूर है। सरकार के तरफ से मिलने वाले दुध से केन्द्र में पढने वाले बच्चों की सेहत बेहतर तो नही हो रही है पर आंगनबाड़ी सेविकाओं समेत उनके परिजन जरूर ताकतवर बन रहे है। सबसे पहलू तो यह है कि प्रति केन्द्र पर चालीस बच्चों को पढाने है। वह भी जो विद्यालय से दूर है। इस बीच प्रखंड में कुल 146 आंगनबाड़ी केंन्द्र स्थापित किये गये है। जिसमें करीब साठ फिसद केन्द्र नही चलते है। जो संचालित होते है उनमें कोई केन्द्र नही है जहां रोज निर्धारित चालीस बच्चें पढने आते है। संचालित सभी केन्द्रों पर आधे से एक दर्जन बच्चें शिक्षा अध्ययन को पहुंचते है। इसका खुलासा कई बार औचक निरीक्षण के बाद हो चुका है। सरकार के तरफ से बरोज पोषाहार मेंं चना दाल मिला खिचडी खिलाने का भी विधान है। पर इसके जगह बिस्कुट देकर काम चला दिया जाता है। सीडीपीओ मनोरमा कुमारी कार्यालय बहुत कम आती है। लगातार तीन दिनों से सम्पर्क किया गया परन्तू नही मिलीं। मोबाईल की घंटी बजती रही फर रिसीव नही हुआ। जिससे उनका पक्ष नही मिल सका।
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