सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:-
एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन बिहार चैप्टर के वार्षिक सम्मेलन के कार्यक्रम के पहले दिन में राज्य के ख्याति प्राप्त चिकित्सकों ने हिस्सा लिया वहीं इस कार्यशाला में पटना से आए हुए ख्याति प्राप्त वरीय पैथोलॉजिस्ट डॉ प्रभात रंजन ने बताया कि चिकित्सा जगत में आधुनिक चिकित्सा पद्धति जटिल से जटिल बीमारियों का समय पर प्रामाणिक जांच द्वारा अपने बिहार में ही इलाज संभव है
हर साल फेफड़े के रोग से दुनिया भर में लाखों लोग मारे जाते हैं
फेफड़े के जटिल रोगों का इलाज मुश्किल नहीं है अगर समय रहते इसके लक्षणों को सही परीक्षण कर इस पर विजय पाए जा सकते हैं हमारे बिहार में प्रामाणिक जांच केंद्रो का घोर अभाव है और इन जटिल बीमारियों के इलाज के लिए पटना कंकरबाग स्थित डॉ प्रभात रंजन डायग्नोस्टिक रिसर्च सेंटर एवं डॉ मधुकर क्लीनिक मैं अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा इलाज संभव है
वही इस अवसर पर पधारे वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजीत कुमार मधुकर ने बताया कि बॉयोसपी के द्वारा गले से लेकर फेफड़े विभिन्न भागों का परीक्षण कर इससे सांस के रोगों का सही आकलन किया जा सकता है गले के कैंसर के इलाज के लिए बिहार से बाहर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है वहीं वरीय रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर अमर कुमार सिंह ने बताया कि सीटी स्कैन के द्वारा गले से लेकर फेवरेट तक विभिन्न भागों को सीधा देखा जा सकता है जांच परीक्षण के उपरांत जटिल रोगों पर विजय हासिल किया जा सकता है।
एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन बिहार चैप्टर के वार्षिक सम्मेलन के कार्यक्रम के पहले दिन में राज्य के ख्याति प्राप्त चिकित्सकों ने हिस्सा लिया वहीं इस कार्यशाला में पटना से आए हुए ख्याति प्राप्त वरीय पैथोलॉजिस्ट डॉ प्रभात रंजन ने बताया कि चिकित्सा जगत में आधुनिक चिकित्सा पद्धति जटिल से जटिल बीमारियों का समय पर प्रामाणिक जांच द्वारा अपने बिहार में ही इलाज संभव है
हर साल फेफड़े के रोग से दुनिया भर में लाखों लोग मारे जाते हैं
फेफड़े के जटिल रोगों का इलाज मुश्किल नहीं है अगर समय रहते इसके लक्षणों को सही परीक्षण कर इस पर विजय पाए जा सकते हैं हमारे बिहार में प्रामाणिक जांच केंद्रो का घोर अभाव है और इन जटिल बीमारियों के इलाज के लिए पटना कंकरबाग स्थित डॉ प्रभात रंजन डायग्नोस्टिक रिसर्च सेंटर एवं डॉ मधुकर क्लीनिक मैं अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा इलाज संभव है
वही इस अवसर पर पधारे वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजीत कुमार मधुकर ने बताया कि बॉयोसपी के द्वारा गले से लेकर फेफड़े विभिन्न भागों का परीक्षण कर इससे सांस के रोगों का सही आकलन किया जा सकता है गले के कैंसर के इलाज के लिए बिहार से बाहर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है वहीं वरीय रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर अमर कुमार सिंह ने बताया कि सीटी स्कैन के द्वारा गले से लेकर फेवरेट तक विभिन्न भागों को सीधा देखा जा सकता है जांच परीक्षण के उपरांत जटिल रोगों पर विजय हासिल किया जा सकता है।
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