सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:- भूमि अधिकार के उद्देश्य से आयोजित एवं गाँधी आश्रम, भितिहरवा से गाँधी मैदान, पटना के लिए चली सत्याग्रह संवाद पदयात्रा का काफिला बुधवार की संध्या बेतिया पहुँचा, जहाँ लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) के सदस्यों आदि ने भव्य स्वागत किया। इस क्रम में पदयात्रियों के सम्मान में एम.जे.के. कॉलेज में कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता वरीय कवि किशोरी लाल अंशुमाली ने की। श्री अंशुमाली ने पढ़ा कि हो राही तुम संभल के चलना गाँधी जी के देश में, कितने दरिन्दे छुपे हुए हैं इंसानों के भेश में। कार्यक्रम संयोजक एवं पीयूसीएल के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. आर.के. चौधरी ने कवि-शायरों एवं पदयात्रियों का स्वागत किया। वरीय शायर अबुल खैर निश्तर ने कहा कि हवा जहरीली होती जा रही है, मसीहा ऐश करते हैं घरों में। डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना ने भोजपुरी में पढ़ा कि अच्छा बा गाँधी बाबा रऊआ ना जीयत बानी, सरगे में बैठ के लुगरी आपन सीयत बानी। डॉ. जफर इमाम ने कहा कि उड़ने वाले हैं कितना समझायेंगे, धरती से कटते कटते कट जायेंगे। अरुण गोपाल ने पढ़ा कि रातें ही नहीं दिन को भी डर लगने लगा है, इस दर्जा बेहिसी का असर लगने लगा है। संचालन करते हुए सुरेश गुप्त ने शेर पेश किया कि फूल लेकर गुलसितां से हम चले थे बाँटने, क्यों जमाने की नजर में खार हो के रह गये। कवि-सम्मेलन को रंजीत वर्मा (पटना), प्रो. कमरुज्जमा कमर, डॉ. नसीम अहमद नसीम, दीनानाथ द्विवेदी दीन, एडवर्ड रफायल, भूपेन्द्र शेष, अनिल अनल, निखिल चन्द्र पाण्डेय, जगमोहन कुमार, जयकिशोर जय, चन्द्रिका राम, मनोज सिन्हा, अख्तर आनंद, एकरामुल हसन, मो. सोहराब आदि ने अपनी रचनाओं से ऊँचाई प्रदान की। धन्यवादज्ञापन प्रो. प्रकाश ने किया। मौके पर सत्याग्रह संवाद पदयात्रा आयोजन समिति के संयोजक डॉ. शमसुल हक, पंकज, पीयूसीएल के उपाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद, सचिव मनोज कुमार, पूर्व सचिव रमेश कुमार, संयुक्त सचिव प्रगति कुमारी गुप्ता, अजहर आलम, क्षितिज व्यास, जितेन्द्र कुमार आदि सहित सैकड़ों महिला-पुरुष पदयात्री उपस्थित थे।

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