सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:- आज पूरे बिहार में जितने भी परीक्षार्थी इस परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं उनमें अधिकांश छात्र इन्हीं वित्तीय संस्थानों से है आज बिहार विद्यालय परीक्षा समिति कपूरा खर्च इन संस्थानों द्वारा किए गए राशियों से चलता है बिहार के सुदूर ग्रामीण शहरी क्षेत्रों के गरीब निर्धन मध्यम वर्ग पिछड़े अति पिछड़े दलित महादलित समाज के घरों में जहां सदियों से और शिक्षा रूपी अंधकार था वहा शिक्षा का जो भी रोशनी फैली है उन में वित्त रहित कर्मियों का ही योगदान सर्वाधिक है बिहार के शैक्षणिक विकास दर में जी. इ. आर मैं इन वित्त रहित कर्मियों का योगदान अधिक है फिर भी सरकार इनके साथ वर्षों से सौतेला व्यवहार करती आ रही है आज तक इन्हें नाही वेतनमान मिला और ना ही समय पर अनुदान ही मिल पाता है जहां अन्य राज्यों में वित्त रहित कर्मियों को घाटा अनुदान मिल रहा है सेवानिवृत्ति की आयु सीमा भी अधिक है बिहार में वितरित कर्मियों का केवल शोषण और दोहन हो रहा है परंतु सरकार के भूल गई है सरकार बनाने और उखाड़ने में कर्मियों का योगदान भी होता है बिहार के सभी वित्त रहित कर्मियों से आवान करता हूं वे संगठित हो जाए और अपने अपने अपमान का बदला लेने के लिए कमर कस लें और पटना की धरती पर हजारों की संख्या में एकत्रित होकर सरकार को एहसास दिलाते हैं कि हम भी किसी से कम नहीं है हमें मिटा दो या आप में दम नहीं

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