सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:-
जुमलेबाज मोदी सरकार को आगामी चुनाव में उखाड़ फेंके - दीपंकर भट्टाचार्य
महाराजा स्टेडियम में संपन्न हुई भाकपा माले की जन अधिकार रैली
बेतिया, 5 फरवरी, भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव कमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव देश को संविधान को बचाने का संघर्ष होगा और आरक्षण को खंडित करने और नागरिकता के अधिकार को खत्म करने पर आमदा तथा पूरे देश में लूट - झूठ और हिंसा - नफरत की राजनीति करने वाली मोदी सरकार को धूल चटाया जाएगा।
भाकपा माले महासचिव आज बेतिया के महाराजा स्टेडियम में गन्ना लूट- भूमि लूट राज के खिलाफ आयोजित जन अधिकार रैली को संबोधित कर रहे थे।भाजपा भगाओ - लोकतंत्र बचाओ, आरक्षण बचाओ- संविधान बचाओ नारे के साथ आयोजित इस रैली में जिले भर से आए हजारों आम किसानों - मजदूरों, स्कीम वर्करो और महिलाओं के साथ ही गन्ना किसानों की भी बड़ी तादाद में शामिल हुई ।
हाथों में लाल झंडा लिए पैदल चलकर और सैकड़ों छोटे बड़े वाहनों से यहां पहुंचे लोगों द्वारा रैली स्थल जाने के दौरान बेतिया शहर की सड़कों पर लाल झंडों का हुजूम उमड़ा दिख रहा था। जुलूस की शक्ल में अलग-अलग जतथा में पहुंचे लोगों ने अंग्रेजो के समय के कानून औपनिवेशिक भूमी कानून कोर्ट ऑफ वर्ड्स को खत्म करो, किसानों के गन्ना मूल्य की लूट पर रोक लगाने, तथा बकाया कीमत अविलंब भुगतान करने तथा आशा, रसोईया व आंगनवाड़ी की स्कीम वर्कर महिलाओं के श्रम और मजदूरी की लूट पर रोक लगाते हुए उनको न्यूनतम ₹18000 का मासिक वेतन देने की मांग के नारे लगाए।
रैली में लोगों को संबोधित करते हुए महासचिव ने कहा कि हमारे देश के संविधान में सबको अपने हक- अधिकार की बात रखने की आजादी है लेकिन चंपारण में इस अधिकार को दबाने के आंदोलनकारीयो पर लगतर फर्जी मुकदमे दर्ज करने और उनको गिरफ्तार कर जेल में डालने की जो कार्रवाई चल रही है उसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने तमाम कार्यकर्ताओ पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की उन्होंने कहा कि केवल चंपारण में ही नहीं पूरे देश में गन्ना किसानों के साथ मोदी सरकार मे बुरा बर्ताव किया जा रहा है। पिछले दिनों नवंबर के महीनों में अपने फसलों की कीमत और कर्ज माफी की मांग को लेकर के साथ देशभर के किसानों ने दिल्ली में संसद के सामने प्रदर्शन किया और कहा कि खेती में लागत खर्च बढ़ रहा है, खेती घाटे में है इसलिए किसानों को कहां की स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक लागत से मिलना चाहिए। किसानों ने यह भी मांग उठाई की सरकार सभी किसानों की फसल की तथा उनके मूल्य की अदायगी की गारंटी करे, तथापि पूजीपतियों को देश का धन लूट कर भागने की छूट देने के बजाय किसानों की कर्ज माफी के लिए कदम उठाकर किसानों की आत्माहत्या को रोकने का काम करे।
माले महासचिव ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछली 1फरवरी को संविधान के नियमों को ताक पर रखते हुए जो जुमला बजट पेश किया उसमें किसानो की इन मांगों का मजाक उड़ाते हुए तथा उनको अपमानित करते हुए साल भर में ₹6000 की जो नगद मदद देने की-- वह भी सिर्फ उन किसानों को जिनके पास जमीन है-- देने की घोषणा की है।
माले।महासचिव ने कहा कि देशभर में और बिहार में बड़े पैमाने पर गरीबों को उनकी जमीन से बेदखल करने का अभियान चल रहा है। चंपारण में यह अभियान काफी तेजी से चल रहा है। जिस चंपारण में गांधी का सत्याग्रह आंदोलन चला, पिछले साल इसकी काफी तामझाम से शताब्दी वर्ष बनाया गया, क्या वहां अंग्रेजों के राज का नहीं कानून चलेगा? फिर देश में आजादी का क्या मतलब रह जाएगा ।
माले महासचिव ने कहा कि आज देश में बेरोजगारी की दर चरम पर जा पहुंच गई है। सरकार उसे दबाने और रोजगार की तलाश और मांग कर रहे नौजवानों को बरगलाने जिन्हें विभाजित करने के लिए हर तरह की साजिश चल रही है। जिसमें सामान्य कोटि को 10% आरक्षण का झुनझुना भी शामिल है। इसके लिए संविधान में आरक्षण के प्रावधान को खत्म करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। 13% रोस्टर लाकर विश्वविद्यालयों में नियुक्ति से दलितों-पिछडो को बाहर कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि देश के नौजवान मजदूर किसान और महिलाओं स्कीम वर्करो की एकजुट ताकत से मोदी सरकार को परास्त करने के लिए पूरे देश में लाल लाहर उठ खड़ी हुई है जो न केवल संविधान और लोकतंत्र को बचाएगी बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अधिकार को संविधान का मूल अधिकार बताते हुए उसे और मजबूत करेगी।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जो करप्शन, क्राइम और कम्यूनल को बर्दाश्त न करने की बात करते थे आज पूरे बिहार को इनका अड्डा बना हुआ है। बिहार में अपराध, संप्रदायिक हिंसा और मॉब लिंचिंग की घटनाएं बेतहाशा बढ़ गई है । उन्होंने बिहार में लाल झंडे की मजबूत साझेदारी व भागीदारी के बैगर कोई भाजपा विरोधी मोर्चा बनाना नामुमकिन है।
जन अधिकार रैली को करते हुए पोलित ब्यूरो के सदस्य अखिल भारतीय ग्रामीण मजदूर सभा के महासचिव धीरेंद्र झा ने किसान मजदूरों से आगामी 18 फरवरी को भूमि से बेदखल , फसल की लूट के खिलाफ आयोजित किसान- मजदूर संगठन के बिहार विधान सभा मार्च में शामिल होने की जोरदार अपील की।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का जन शिकायत निवारण कानून गरीबों को बरसों से बसे जमीन से उजारने का हथियार बन गया है, ऐसे में हमें जो जमीन सरकारी है वह जमीन हमारी है, जिस जमीन पर हम बसे हैं वह जमीन हमारी है का नारा बुलंद करना होगा, और मुकदमा और दमन से आंदोलन को दबाने की कोशिश का जोरदार जवाब देना होगा।
जन अधिकार रैली को भाकपा माले केंद्रीय कमेटी के सदस्य वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता, रसोईया संघ के राजनेता दिनेश कुशवाहा, भाकपा माले चंपारण जिला कमेटी के सदस्य संजय राम, बेतिया राज भूमि संघर्ष समिति के नेता संजय यादव, खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के जिला सचिव मुख्तार मियां आदि नेताओं ने भी रैली को संबोधित किया। रैली का संचालन जिले के किसान नेता कामरेड सुनील कुमार राव ने किया।
रैली में 10 सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया। रैली मंच पर एक्टू के जिला सचिव रविंद्र कुमार रवि, आइसा नेत्री निखिता कुमारी, राज्य कर्मचारियों के नेता भैरव प्रसाद सिंह, भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य सुनील यादव और प्रभूदेव यादव सहीत जिले के कई माले नेता मौजूद थे।
सुनील कुमार यादव

जुमलेबाज मोदी सरकार को आगामी चुनाव में उखाड़ फेंके - दीपंकर भट्टाचार्य
महाराजा स्टेडियम में संपन्न हुई भाकपा माले की जन अधिकार रैली
बेतिया, 5 फरवरी, भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव कमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव देश को संविधान को बचाने का संघर्ष होगा और आरक्षण को खंडित करने और नागरिकता के अधिकार को खत्म करने पर आमदा तथा पूरे देश में लूट - झूठ और हिंसा - नफरत की राजनीति करने वाली मोदी सरकार को धूल चटाया जाएगा।
भाकपा माले महासचिव आज बेतिया के महाराजा स्टेडियम में गन्ना लूट- भूमि लूट राज के खिलाफ आयोजित जन अधिकार रैली को संबोधित कर रहे थे।भाजपा भगाओ - लोकतंत्र बचाओ, आरक्षण बचाओ- संविधान बचाओ नारे के साथ आयोजित इस रैली में जिले भर से आए हजारों आम किसानों - मजदूरों, स्कीम वर्करो और महिलाओं के साथ ही गन्ना किसानों की भी बड़ी तादाद में शामिल हुई ।
हाथों में लाल झंडा लिए पैदल चलकर और सैकड़ों छोटे बड़े वाहनों से यहां पहुंचे लोगों द्वारा रैली स्थल जाने के दौरान बेतिया शहर की सड़कों पर लाल झंडों का हुजूम उमड़ा दिख रहा था। जुलूस की शक्ल में अलग-अलग जतथा में पहुंचे लोगों ने अंग्रेजो के समय के कानून औपनिवेशिक भूमी कानून कोर्ट ऑफ वर्ड्स को खत्म करो, किसानों के गन्ना मूल्य की लूट पर रोक लगाने, तथा बकाया कीमत अविलंब भुगतान करने तथा आशा, रसोईया व आंगनवाड़ी की स्कीम वर्कर महिलाओं के श्रम और मजदूरी की लूट पर रोक लगाते हुए उनको न्यूनतम ₹18000 का मासिक वेतन देने की मांग के नारे लगाए।
रैली में लोगों को संबोधित करते हुए महासचिव ने कहा कि हमारे देश के संविधान में सबको अपने हक- अधिकार की बात रखने की आजादी है लेकिन चंपारण में इस अधिकार को दबाने के आंदोलनकारीयो पर लगतर फर्जी मुकदमे दर्ज करने और उनको गिरफ्तार कर जेल में डालने की जो कार्रवाई चल रही है उसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने तमाम कार्यकर्ताओ पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की उन्होंने कहा कि केवल चंपारण में ही नहीं पूरे देश में गन्ना किसानों के साथ मोदी सरकार मे बुरा बर्ताव किया जा रहा है। पिछले दिनों नवंबर के महीनों में अपने फसलों की कीमत और कर्ज माफी की मांग को लेकर के साथ देशभर के किसानों ने दिल्ली में संसद के सामने प्रदर्शन किया और कहा कि खेती में लागत खर्च बढ़ रहा है, खेती घाटे में है इसलिए किसानों को कहां की स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक लागत से मिलना चाहिए। किसानों ने यह भी मांग उठाई की सरकार सभी किसानों की फसल की तथा उनके मूल्य की अदायगी की गारंटी करे, तथापि पूजीपतियों को देश का धन लूट कर भागने की छूट देने के बजाय किसानों की कर्ज माफी के लिए कदम उठाकर किसानों की आत्माहत्या को रोकने का काम करे।
माले महासचिव ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछली 1फरवरी को संविधान के नियमों को ताक पर रखते हुए जो जुमला बजट पेश किया उसमें किसानो की इन मांगों का मजाक उड़ाते हुए तथा उनको अपमानित करते हुए साल भर में ₹6000 की जो नगद मदद देने की-- वह भी सिर्फ उन किसानों को जिनके पास जमीन है-- देने की घोषणा की है।
माले।महासचिव ने कहा कि देशभर में और बिहार में बड़े पैमाने पर गरीबों को उनकी जमीन से बेदखल करने का अभियान चल रहा है। चंपारण में यह अभियान काफी तेजी से चल रहा है। जिस चंपारण में गांधी का सत्याग्रह आंदोलन चला, पिछले साल इसकी काफी तामझाम से शताब्दी वर्ष बनाया गया, क्या वहां अंग्रेजों के राज का नहीं कानून चलेगा? फिर देश में आजादी का क्या मतलब रह जाएगा ।
माले महासचिव ने कहा कि आज देश में बेरोजगारी की दर चरम पर जा पहुंच गई है। सरकार उसे दबाने और रोजगार की तलाश और मांग कर रहे नौजवानों को बरगलाने जिन्हें विभाजित करने के लिए हर तरह की साजिश चल रही है। जिसमें सामान्य कोटि को 10% आरक्षण का झुनझुना भी शामिल है। इसके लिए संविधान में आरक्षण के प्रावधान को खत्म करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। 13% रोस्टर लाकर विश्वविद्यालयों में नियुक्ति से दलितों-पिछडो को बाहर कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि देश के नौजवान मजदूर किसान और महिलाओं स्कीम वर्करो की एकजुट ताकत से मोदी सरकार को परास्त करने के लिए पूरे देश में लाल लाहर उठ खड़ी हुई है जो न केवल संविधान और लोकतंत्र को बचाएगी बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अधिकार को संविधान का मूल अधिकार बताते हुए उसे और मजबूत करेगी।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जो करप्शन, क्राइम और कम्यूनल को बर्दाश्त न करने की बात करते थे आज पूरे बिहार को इनका अड्डा बना हुआ है। बिहार में अपराध, संप्रदायिक हिंसा और मॉब लिंचिंग की घटनाएं बेतहाशा बढ़ गई है । उन्होंने बिहार में लाल झंडे की मजबूत साझेदारी व भागीदारी के बैगर कोई भाजपा विरोधी मोर्चा बनाना नामुमकिन है।
जन अधिकार रैली को करते हुए पोलित ब्यूरो के सदस्य अखिल भारतीय ग्रामीण मजदूर सभा के महासचिव धीरेंद्र झा ने किसान मजदूरों से आगामी 18 फरवरी को भूमि से बेदखल , फसल की लूट के खिलाफ आयोजित किसान- मजदूर संगठन के बिहार विधान सभा मार्च में शामिल होने की जोरदार अपील की।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का जन शिकायत निवारण कानून गरीबों को बरसों से बसे जमीन से उजारने का हथियार बन गया है, ऐसे में हमें जो जमीन सरकारी है वह जमीन हमारी है, जिस जमीन पर हम बसे हैं वह जमीन हमारी है का नारा बुलंद करना होगा, और मुकदमा और दमन से आंदोलन को दबाने की कोशिश का जोरदार जवाब देना होगा।
जन अधिकार रैली को भाकपा माले केंद्रीय कमेटी के सदस्य वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता, रसोईया संघ के राजनेता दिनेश कुशवाहा, भाकपा माले चंपारण जिला कमेटी के सदस्य संजय राम, बेतिया राज भूमि संघर्ष समिति के नेता संजय यादव, खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के जिला सचिव मुख्तार मियां आदि नेताओं ने भी रैली को संबोधित किया। रैली का संचालन जिले के किसान नेता कामरेड सुनील कुमार राव ने किया।
रैली में 10 सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया। रैली मंच पर एक्टू के जिला सचिव रविंद्र कुमार रवि, आइसा नेत्री निखिता कुमारी, राज्य कर्मचारियों के नेता भैरव प्रसाद सिंह, भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य सुनील यादव और प्रभूदेव यादव सहीत जिले के कई माले नेता मौजूद थे।
सुनील कुमार यादव

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