सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:- शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित चंद्रावत नदी पर बना यह संत घाट का पुल जिले में ऐतिहासिक महत्त्व रखता है। लेकिन वर्तमान उतना ही भयावह है। इस से होकर यात्रा करना अपनी जान जोखिम में डालने के बराबर है। दरअसल यह पुल इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी गिर सकता है। बावजूद इसके निर्माण की दिशा में प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। लगभग 6 माह पहले जब पुल का एक हिस्सा धसा...तब से इस पर आवागमन बाधित है। पुल पर आवागम ना हो इसके लिए प्रशासन ने पुल की घेराबंदी कर दी। इस घेराबंदी के बावजूद भी पूल से होकर प्रतिदिन सैकड़ो साइकिल, मोटरसाइकिल, रिक्शा, ठेला आदि का गुजरना बदस्तूर जारी है। स्थानीय लोगों की मानें तो पुल गिरने का खतरा लगातार बना रहता है। फिलहाल पुल कब बनेगा इसका कोई अता पता नहीं है। कहने को तो स्थानीय विधायक और सांसद वर्तमान सरकार में है...लेकिन फिर भी उनकी तरफ से कोई ठोस पहल अब तक नहीं दिखी।भलें ही पूल के विकल्प के रूप में एक डायवर्शन बनाया गया है। जिससे होकर अन्य वाहनों की आवाजाही होती है...लेकिन वहां भी स्थिति कम खतरनाक नहीं है। डायवर्सन दोनों ओर से खुला है, इस कारण नदी में गिरने का खतरा लगातार बना रहता है।

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