बिहार के आखरी अंग्रेज की मूर्ति बेत्तिया में तोड़ा गया
सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:-
बेतिया के महारानी जानकी कुंवर अस्पताल में एडवर्ड सप्तम जो अंग्रेजी शासक था उसकी मूर्ति को आज बड़े धूमधाम से युवा जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के द्वारा तोड़ दिया गया। इस अंग्रेज की मूर्ति को तोड़ते समय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। सुबह 10:30 बजे 50 60 की संख्या में युवा जागरण मंच के कार्यकर्ता हॉस्पिटल के पीछे के द्वार पर लगा लगभग 6 फीट ऊंचा अंग्रेज की मूर्ति को तोड़ने के लिए इकट्ठा हो गए। आधे घंटे के अंदर सब ने मिलकर मूर्ति को तोड़ दिया। अंग्रेज शासक एडवर्ड के टूटे हुए सर पर पैर रखकर युवाओं ने भारत माता की जय, वंदे मातरम का नारा भी लगाया। दीपेश सिंह मनीष कश्यप और रोहित मिश्रा के नेतृत्व में इस अंग्रेज की मूर्ति को तोड़ा गया। आनंद गुप्ता, मंकेश सिंह, चंदन उपाध्याय, सचिन भगत, विक्की सिंह, सारंग, राहुल गुप्ता, प्रिंस पांडे आदि बहुत से युवा मूर्ति को तोड़ते समय मौजूद थे।
युवा जागरण मंच के कार्यकर्ता मनीष कश्यप ने बताया कि इस मूर्ति से महज कुछ मीटर दूरी पर वह ऐतिहासिक रमना का मैदान है जहां कभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस आए थे और अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था, लिहाजा उनकी याद में अंग्रेज के मूर्ति की जगह पर सुभाष चंद्र बोस की सैन्य छवि वाली प्रतिमा लगाई जाएगी और इसके लिए पूरे चंपारण के लोगों से भिक्षाटन किया जाएगा, जिससे चंपारण के लोगों को यह एहसास होते रहे कि सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों के वजह से ही हमें आजादी मिली है और इस आजादी को हम बनाए रखें। युवा जागरण मंच के अध्यक्ष दीपेश सिंह ने बताया कि बहुत जल्द उस जगह पर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगा दी जाएगी। महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा ने कहा कि इस गुलामी की आखिरी निशानी को तोड़कर हमें बहुत खुशी मिल रही है। अगर ऐसा कोई भी मूर्ति पूरे बिहार में किसी को दिखाई दे तो हमें खबर दे। मैं रोहित मिश्रा, दीपेश सिंह और मनीष कश्यप वहां पर पहुंचकर उस गुलामी के प्रतीक को तोड़ देंगे।
बेतिया के महारानी जानकी कुंवर अस्पताल में एडवर्ड सप्तम जो अंग्रेजी शासक था उसकी मूर्ति को आज बड़े धूमधाम से युवा जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के द्वारा तोड़ दिया गया। इस अंग्रेज की मूर्ति को तोड़ते समय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। सुबह 10:30 बजे 50 60 की संख्या में युवा जागरण मंच के कार्यकर्ता हॉस्पिटल के पीछे के द्वार पर लगा लगभग 6 फीट ऊंचा अंग्रेज की मूर्ति को तोड़ने के लिए इकट्ठा हो गए। आधे घंटे के अंदर सब ने मिलकर मूर्ति को तोड़ दिया। अंग्रेज शासक एडवर्ड के टूटे हुए सर पर पैर रखकर युवाओं ने भारत माता की जय, वंदे मातरम का नारा भी लगाया। दीपेश सिंह मनीष कश्यप और रोहित मिश्रा के नेतृत्व में इस अंग्रेज की मूर्ति को तोड़ा गया। आनंद गुप्ता, मंकेश सिंह, चंदन उपाध्याय, सचिन भगत, विक्की सिंह, सारंग, राहुल गुप्ता, प्रिंस पांडे आदि बहुत से युवा मूर्ति को तोड़ते समय मौजूद थे।
युवा जागरण मंच के कार्यकर्ता मनीष कश्यप ने बताया कि इस मूर्ति से महज कुछ मीटर दूरी पर वह ऐतिहासिक रमना का मैदान है जहां कभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस आए थे और अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था, लिहाजा उनकी याद में अंग्रेज के मूर्ति की जगह पर सुभाष चंद्र बोस की सैन्य छवि वाली प्रतिमा लगाई जाएगी और इसके लिए पूरे चंपारण के लोगों से भिक्षाटन किया जाएगा, जिससे चंपारण के लोगों को यह एहसास होते रहे कि सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों के वजह से ही हमें आजादी मिली है और इस आजादी को हम बनाए रखें। युवा जागरण मंच के अध्यक्ष दीपेश सिंह ने बताया कि बहुत जल्द उस जगह पर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगा दी जाएगी। महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा ने कहा कि इस गुलामी की आखिरी निशानी को तोड़कर हमें बहुत खुशी मिल रही है। अगर ऐसा कोई भी मूर्ति पूरे बिहार में किसी को दिखाई दे तो हमें खबर दे। मैं रोहित मिश्रा, दीपेश सिंह और मनीष कश्यप वहां पर पहुंचकर उस गुलामी के प्रतीक को तोड़ देंगे।
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