*टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी सरकार से कर रहे है शिक्षक बहाली की माँग*
सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:-
बेतिया- बिहार टीईटी/सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा के बैनर तले जिला के सैकडों की संख्या में टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी समाहरणालय के समक्ष राष्ट्रीय युवा दिवस पर धरना पर बैठे रहे। टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुये कहा कि बिहार सरकार उनकी बहाली नहीं कर रही है। सभी टीईटी उत्तीर्ण प्रशिक्षित अभ्यर्थी एनसीईटी द्वारा निर्धारित सभी मापदंडो को पूरा करते है। सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन कर कर रही है। दरअसल, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों के 02 लाख से अधिक पद वर्षों से रिक्त पडे है जबकि टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की संख्या पूरे राज्य में महज 50 हजार होगी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार प्रारंभिक विद्यालयों में छात्र शिक्षक अनुपात 30:1 होनी चाहिये जो वर्तमान में 63:1 है। राज्य सरकारें 10% से अधिक रिक्तियाँ नहीं रख सकती है।
मोर्चा के प्रदेश सहसंयोजक सोनू कुमार सोनी ने बतलाया कि शिक्षक बहाली के मुद्दा पर बिहार सरकार बार-बार नियोजित शिक्षकों के सुप्रीम कोर्ट में एक साल से लंबित मामले की फैसला आने के बाद बहाली करने की बात करती है। ऐसे में बहाली में देरी होने से 2011 में उत्तीर्ण शेष बचे हजारों टीईटी अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटता हुआ है जिनकी उम्रसीमा एवं प्रमाणपत्र की वैधता समाप्ति के कगार पर है। उन्होंने कहा की शिक्षा का अधिकार अधिनियम का सरकार पालन नहीं कर रही है। राज्य में हजारों विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे चल रहे है। वैसे विद्यालयों में पठन पाठन के क्रियाकलाप कैसे संभव है ? ऐसे में इन विद्यालयों में पढ रहे राज्य के गरीब, किसान, पिछडे एवं वंचित वर्ग के बच्चे बुरी तरह प्रभावित हो रहे है। बिहार सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बहाना छोडकर वैकल्पिक व्यवस्था करके शिक्षकों की बहाली करें।
प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षक बहाली की माँगों को लेकर सैकडों की संख्या में धरना-प्रदर्शन कर रहे टीईटी/सीटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने सरकार पर तंज कसते हुये कहा कि सरकार की नीति शिक्षा विरोधी है। यदि शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जनवरी माह में नहीं आता है तो सरकार के गलत नीतियों के खिलाफ आंदोलन और तेज किया जायेगा तथा लोकसभा चुनाव में नोटा एक विकल्प बनेगा। धरना प्रदर्शन में बृजेश सोनी, जितेन्द्र कुमार, सुजीत कुमार, सुनिल कुमार, पवन कुमार, जवाहर कुमार, अजय पासवान, धनंजय कुमार, विकास कमार सैकडो अभ्यर्थी मौजूद रहे।
बेतिया- बिहार टीईटी/सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा के बैनर तले जिला के सैकडों की संख्या में टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी समाहरणालय के समक्ष राष्ट्रीय युवा दिवस पर धरना पर बैठे रहे। टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुये कहा कि बिहार सरकार उनकी बहाली नहीं कर रही है। सभी टीईटी उत्तीर्ण प्रशिक्षित अभ्यर्थी एनसीईटी द्वारा निर्धारित सभी मापदंडो को पूरा करते है। सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन कर कर रही है। दरअसल, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों के 02 लाख से अधिक पद वर्षों से रिक्त पडे है जबकि टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की संख्या पूरे राज्य में महज 50 हजार होगी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार प्रारंभिक विद्यालयों में छात्र शिक्षक अनुपात 30:1 होनी चाहिये जो वर्तमान में 63:1 है। राज्य सरकारें 10% से अधिक रिक्तियाँ नहीं रख सकती है।
मोर्चा के प्रदेश सहसंयोजक सोनू कुमार सोनी ने बतलाया कि शिक्षक बहाली के मुद्दा पर बिहार सरकार बार-बार नियोजित शिक्षकों के सुप्रीम कोर्ट में एक साल से लंबित मामले की फैसला आने के बाद बहाली करने की बात करती है। ऐसे में बहाली में देरी होने से 2011 में उत्तीर्ण शेष बचे हजारों टीईटी अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटता हुआ है जिनकी उम्रसीमा एवं प्रमाणपत्र की वैधता समाप्ति के कगार पर है। उन्होंने कहा की शिक्षा का अधिकार अधिनियम का सरकार पालन नहीं कर रही है। राज्य में हजारों विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे चल रहे है। वैसे विद्यालयों में पठन पाठन के क्रियाकलाप कैसे संभव है ? ऐसे में इन विद्यालयों में पढ रहे राज्य के गरीब, किसान, पिछडे एवं वंचित वर्ग के बच्चे बुरी तरह प्रभावित हो रहे है। बिहार सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बहाना छोडकर वैकल्पिक व्यवस्था करके शिक्षकों की बहाली करें।
प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षक बहाली की माँगों को लेकर सैकडों की संख्या में धरना-प्रदर्शन कर रहे टीईटी/सीटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने सरकार पर तंज कसते हुये कहा कि सरकार की नीति शिक्षा विरोधी है। यदि शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जनवरी माह में नहीं आता है तो सरकार के गलत नीतियों के खिलाफ आंदोलन और तेज किया जायेगा तथा लोकसभा चुनाव में नोटा एक विकल्प बनेगा। धरना प्रदर्शन में बृजेश सोनी, जितेन्द्र कुमार, सुजीत कुमार, सुनिल कुमार, पवन कुमार, जवाहर कुमार, अजय पासवान, धनंजय कुमार, विकास कमार सैकडो अभ्यर्थी मौजूद रहे।
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