खसरा एवं रूबेला रोग से बचाव का मात्र एक उपाय है टीकाकरण : किरण शंकर झा

सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया/ सोनू भारद्वाज की रिपोर्ट:- भारत सरकार एवं राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार पटना के निर्देश पर आगामी 15 जनवरी से पश्चिम चंपारण जिला अंतर्गत सभी सरकारी गैर सरकारी निजी विद्यालय मदरसा के साथ साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों एवं छूटे हुए क्षेत्रों में 9 माह से 15 वर्ष के सभी बच्चे बच्चियों को खसरा रूबेला का टीका दिया जाना है पूरे भारत में 29 राज्य एवं 7 केंद्र शासित प्रदेशों में से 30 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 82.44 प्रतिशत बच्चों को खसरा रूबैल्ला टीकाकरण अभियान के तहत प्रति रक्षित किया जा चुका है उक्त बातें पत्रकारों को संबोधित करते हुए जिला प्रतिरक्षण प्राधिकारी डॉक्टर किरण शंकर झा ने कही पत्रकारों को उन्होंने आगे बताया कि पश्चिम चंपारण जिला अंतर्गत लगभग 1506903 बच्चों का लक्ष्य रखा गया है जिसको टीका दिया जाना है इसके लिए लगभग 680 एएनएम एवं सभी आशा एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं को लगाया जाएगा स्कूलों में किसके लिए एक नोडल शिक्षक बनाया गया है जो बच्चों को टीका के लिए प्रोत्साहित करेंगे श्री झा ने बताया कि खसरा रूबेला अभियान को लेकर स्कूलों में अध्ययन कर रहे हैं बच्चों के माता पिता एवं अभिभावकों को के साथ स्कूल की तरफ से एक बैठक का आयोजन किया जाएगा किया जाएगा जिसमें खसरा रूबैल्ला अभियान की विस्तृत जानकारी दी जाएगी स्कूलों में संचालित स्वरों की संख्या लगभग 4606 कथा आंगनवाड़ी केंद्रों एवं छूटे हुए क्षेत्रों में संचालित शत्रु की संख्या लगभग 6853 है स्कूलों में दिए जाने वाले लक्षित बच्चों की संख्या 88 66 53 तथा आंगनवाड़ी केंद्र एवं छूटे हुए क्षेत्रों में दिए जाने वाले लक्षित बच्चों की संख्या लगभग 62 02 50 है श्री झा ने बताया की खसरा रूबैल्ला एक जानलेवा बीमारी है जो वायरस से फैलता है खसरा रोग के कारण बच्चों में विकलांगता या उनकी असमय मृत्यु हो सकती है इसके साथ ही सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं पर असर पड़ता है गर्भवती महिलाएं यदि गर्भावस्था के आरंभ में रूबैल्ला वायरस से संक्रमित हो जाती है तो गर्भ में पल रहे बच्चों को जन्मजात रूबैल्ला सिंड्रोम विकसित हो सकती है जो भ्रूण एवं नवजात शिशु के लिए बेहद गंभीर बना सकता है इसके कारण होने वाले बहुत से लोग जीवन भर के लिए बच्चों को विकलांग बना सकते हैं जिसमें विशेषकर आंखों कानो मस्तिष्क तथा हृदय को प्रभावित कर सकता है खसरा बहुत छोटे बच्चों और वयस्कों के लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है क्योंकि किसके कारण होने वाले डायरिया निमोनिया और मस्तिष्क के संक्रमण की वजह से मृत्यु हो सकती है उन्होंने यह भी बताया कि रूबेला के उपचार के लिए कोई निश्चित इलाज नहीं है इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण ही एक मात्र उपाय है ए माटी का एक बहुत सुरक्षित टिका है तथा पिछले 40 वर्षों से भारत के अलावा अन्य कई देशों में भी करोड़ों बच्चों की सुरक्षा के लिए इस टीका का उपयोग किया जा रहा है अन्य किको की तरह कुछ बच्चे हो मैं चिंता वह घबराहट हो सकती है लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है मौके पर एसीएमओ डॉ अरविंद नारायण सिंह सहित संबंधित कई अधिकारी भी मौजूद थे

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