9 जनवरी को केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल
सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:-
9 जनवरी को केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के समर्थन और बिहार में बढ़ते अपराध ,सेल्टर होम में महिलाओं के साथ बलात्कार करने वाले बलात्कारियों को राज्य सरकार द्वारा बचाने की जांच ,घर बनाकर रह रहे लोगों को उजाड़ने की बर्बर कार्रवाई पर रोक ,गन्ना का मूल्य 4 सौ रुपये क्विंटल करने ,किसानों का कृषि कर्ज माफ करने ,धान क्रय केन्द्र अविलम्ब खोलने ,किसानों के सालों से चीनी मिलों पर बकाये पैसे को 1966 सुगर केन एक्ट के अनुसार ब्याज सहित भुगतान करने ,केरल सरकार के अनुसार सभी स्कीम वर्कर्स को 18 हजार रुपये मासिक वेतन देने के लिए बिहार के सी पी एम ,सी पी आई सहित अन्य 6 वामपंथी दलों ने बिहार बन्द का आह्वान किया था ।उसी रोशनी में वामदल के कार्यकर्ता भी समर्थन में सड़क पर उतरे ।
बन्द समर्थक प्रदर्शनकारी जब समाहरणालय के सामने पहुंचे तो समाहरणालय का दोनों गेट बन्द था । कुछ देर रुक कर बन्द समर्थक बन्द को सफल बनाने के लिए आगे बढ़ गये।
बन्द के चलते तिरहुत कमिश्नर को समाहरणालय पहुंचने में हुए ब्यवधान के चलते समाहर्ता पश्चिम चम्पारण आपे से बाहर होकर अफशरसाहियत के अन्तिम सीमा को लांघते हुए जनता की जनतांत्रिक अधिकारों को पर हमला कर दिये ।जो पूरे बिहार में अन्यत्र कहीं नहीं हुआ ।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जिला सचिव तथा राज्य सचिवमण्डल सदस्य प्रभुराज नारायण राव ,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव तथा राज्य परिषद सदस्य ओम प्रकाश क्रान्ति ने कड़े शब्दों में समाहर्ता के इस अजनतांत्रिक कदम का निन्दा करते हुए अनुरोध करते हैं कि वामदलों के नेताओं पर किये गये केस अविलम्ब वापस लिया जाय तथा हड़ताली रसोईया, सेविका, सहायिका के मांगों को अविलम्ब पूरा किया जाय ।
9 जनवरी को केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के समर्थन और बिहार में बढ़ते अपराध ,सेल्टर होम में महिलाओं के साथ बलात्कार करने वाले बलात्कारियों को राज्य सरकार द्वारा बचाने की जांच ,घर बनाकर रह रहे लोगों को उजाड़ने की बर्बर कार्रवाई पर रोक ,गन्ना का मूल्य 4 सौ रुपये क्विंटल करने ,किसानों का कृषि कर्ज माफ करने ,धान क्रय केन्द्र अविलम्ब खोलने ,किसानों के सालों से चीनी मिलों पर बकाये पैसे को 1966 सुगर केन एक्ट के अनुसार ब्याज सहित भुगतान करने ,केरल सरकार के अनुसार सभी स्कीम वर्कर्स को 18 हजार रुपये मासिक वेतन देने के लिए बिहार के सी पी एम ,सी पी आई सहित अन्य 6 वामपंथी दलों ने बिहार बन्द का आह्वान किया था ।उसी रोशनी में वामदल के कार्यकर्ता भी समर्थन में सड़क पर उतरे ।
बन्द समर्थक प्रदर्शनकारी जब समाहरणालय के सामने पहुंचे तो समाहरणालय का दोनों गेट बन्द था । कुछ देर रुक कर बन्द समर्थक बन्द को सफल बनाने के लिए आगे बढ़ गये।
बन्द के चलते तिरहुत कमिश्नर को समाहरणालय पहुंचने में हुए ब्यवधान के चलते समाहर्ता पश्चिम चम्पारण आपे से बाहर होकर अफशरसाहियत के अन्तिम सीमा को लांघते हुए जनता की जनतांत्रिक अधिकारों को पर हमला कर दिये ।जो पूरे बिहार में अन्यत्र कहीं नहीं हुआ ।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जिला सचिव तथा राज्य सचिवमण्डल सदस्य प्रभुराज नारायण राव ,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव तथा राज्य परिषद सदस्य ओम प्रकाश क्रान्ति ने कड़े शब्दों में समाहर्ता के इस अजनतांत्रिक कदम का निन्दा करते हुए अनुरोध करते हैं कि वामदलों के नेताओं पर किये गये केस अविलम्ब वापस लिया जाय तथा हड़ताली रसोईया, सेविका, सहायिका के मांगों को अविलम्ब पूरा किया जाय ।
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