रसोईयो और अन्य स्कीम वर्करों को न्यूनतम मजदूरी न देकर दिल्ली - पटना की सरकारे कायम कर रही है आधुनिक युग की गुलामी की राज। 34रू दैनिक रसोईयो को मजदूरी देना बिहार सरकार के न्यूनतम मजदूरी कानून का उल्लंघन और अन्याय पूर्ण।

सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से सोनुभारतद्वाज की रिपोर्ट:- 16 जनवरी को प्रखंड कार्यालयों पर रसोइयों की मांगो को लेकर खेग्रामस करेगा धरना प्रदर्शन मुख्यमंत्री- परधानमंत्री का पुतला दहन। बेतिया-14 जनवरी, रसोईयो और अन्या स्कीम वर्करों को केंद्र की भाजपा कि मोदी सरकार और बिहार के नितीश सरकार आधुनिक गुलामी के रूप में खटा रही है पुराने जमाने के गुलाम युग के आधुनिक स्वरूप की तरह है, इस गुलामी के खिलाफ रसोईया और अन्य वर्करों की लड़ाई पूरी मेहनतकस अवाम के साथ नया हिंदुस्तान बनाने की सभी नागरिकों की लड़ाई है, उक्त लड़ाई के समर्थन में 16 जनवरी को अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदुर सभा पुरे बिहार में सभी प्रखंड मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन व मोदी और नितीश का पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित करेगा उक्त वयान देते हुए खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के राज्य अध्यक्ष विरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा की बिहार सरकार अपने ही न्यूनतम मजदूरी के कानून को लागू नहीं कर रही है न्युनतम मजदुरी से बहुत कम मात्र 34रू दैनिक मजदूरी पर विद्यालय रसोइयों को खटाना गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण है, माले सह खेगरामस नेताओं ने रसोईयो को 18000रू मानदेय देने से लेकर सरकारी कर्मचारी दर्जा देने आदी मांगो का समर्थन करते हुए आम अवाम से उनके साथ 7जनवरी से चली आ रही हरताल को समर्थन देने की अपील की वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता राज्य अध्यक्ष खेग्रामस

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